MP Board Class 6 हिंदी सुगम भारती Solutions Chapter 1 मैं ढूँढ़ता तुझे था प्रश्न उत्तर
Madhya Pradesh Board Class 6 Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 1 मैं ढूँढ़ता तुझे था
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. (क) सही जोड़ी बनाइए
1. दीन के – (क) विरक्त
2. कर्म में – (ख) वतन
3. अधीर – (ग) मगन
4. जग से – (घ) मन
उत्तर
1. (ख), 2. (ग), 3. (घ), 4. (क)
प्रश्न (ख) दिए गए शब्दों में से उपयुक्त शब्द छांटकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. मैं…..तुझे था अब कुंज और वन में। (खोजता/ढूंढ़ता)
2. आँखें……..मेरी तब मान और धन में। (लगी थी/खुली थी)
3. हे दीनबंधु! ऐसी…….प्रदान कर तू। (प्रतिमा प्रतिभा)
4. ऐसा प्रभा भर दे मेरे……..मन में। (अशांत/अधीर)
उत्तर
1. ढूँढ़ता
2. लगीं थी
3. प्रतिभा
4. अधीर
प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए
(क) कवि ने ईश्वर को दीनबंधु क्यों कहा है?
उत्तर
कवि ने ईश्वर को दीनबंधु इसलिए कहा है क्योंकि ईश्वर दीन-दुखियों की सेवा में लगा रहता है।
(ख) अधीर मन की अधीरता किस प्रकार दूर हो सकती है?
उत्तर
अधीर मन की अधीरता तब दूर हो सकती है जब कवि ईश्वर को पा लेगा।
(ग) ‘जग की अनित्यता’ का क्या अर्थ है?
उत्तर
इसका अर्थ है-संसार की क्षणभंगुरता।
(घ) कवि किस स्थिति में हार नहीं मानता?
उत्तर
कवि दुख में हार नहीं मानता।
(ङ) “किरन’, ‘सुमन’, ‘पवन’, और ‘गगन’ किसके स्वरूप हैं?
उत्तर
ये सभी ईश्वर के स्वरूप हैं।
(च) कविता में ‘मैं’ और ‘तू’ शब्दों का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
उत्तर
‘मैं’ का प्रयोग कवि के लिए और ‘तू’ का प्रयोग ईश्वर के लिए किया गया है।
प्रश्न 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन से पाँच वाक्यों में दीजिए
(क) केवल संगीत और भजन में ईश्वर को न ढूँढकर और कहाँ-कहाँ ढूँढना चाहिए?
उत्तर
ईश्वर को संगीत और भजन के माध्यम से पाना मुश्किल है। अगर ईश्वर को सही मायने में पाना
तो दीन-दुखियों के बीच जाना पड़ेगा, उनकी सेवा करनी पड़ेगी ईश्वर दीन-दुखियों में निवास करता है।
(ख) “कर्म में मगन और कवन में व्यस्त” इस पंक्ति “भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
ईश्वर परोपकार के काम में लगा था जबकि कवि केवल व्यर्थ बोलने में लगा हुआ था। ईश्वर हमेशा बिना किसी के दबाव के अपना काम करता जाता है। मनुष्य झूठी दुनियादारी में खोया रहता है। मनुष्य के कथनी और करनी में हमेशा अंतर रहता है जबकि ईश्वर कुछ कहता नहीं है, सिर्फ सत्कर्म में लगा रहता है।
(ग) कवि और ईश्वर की उपस्थिति के पाँच-पाँच स्थान बताइए।
उत्तर
कवि-बगीचा, जंगल, मंदिर, चमन, भजन
ईश्वर-दीन-दुखियों के बीच, किरण में, फूलों में, पवन में, आकाश में।।
(घ) ‘मान और धन की अपेक्षा ईश्वर दीन-दुखियों के आँसू में निवास करता है।’ समझाइए।
उत्तर
मानव संसार की चकाचौंध में खोया रहता है। उसे अपने मान-सम्मान और धन-दौलत की ज्यादा चिंता रहती है। इसके विपरीत ईश्वर दीन-दुखियों के आँसू | पोंछने में व्यस्त रहता है। वह गिरे हुए को उठाने में लगा रहता है।
(ङ) ‘दुख में न हार मानूं सुख में तुझे न भूलूं’ पंक्ति में निहित भाव बताइए।
उत्तर
कवि ईश्वर से प्रार्थना करता है कि वह उसमें इतनी क्षमता दे कि वह दुख में हार नहीं माने साथ ही सुख के क्षणों में उसे (ईश्वर को) भूले नहीं।
भाषा की बात
प्रश्न 1. निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
कुंज, संगीत, संगठन, विरक्त, समर्थ।
उत्तर
छात्र स्वयं करें।
प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखिएदुआर, उतथान, आँख, स्वरग, कठनाई, सूयश, सोन्दर्य
उत्तर
द्वार, उत्थान, आँख, स्वर्ग, कठिनाई, सुयश, सौन्दर्य।
प्रश्न 3. निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
बाट, आँसू, पतित, संगठन, अनित्यता।
उत्तर
बाट-माँ कब से बेटे की बाट देख रही है।
आँसू-हमें किसी भी हाल में आँसू नहीं बहाना चाहिए।
पतित-ईश्वर पतितों का उद्धार करता है।
संगठन-हमें किसी संगठन की तरह काम करना चाहिए।
अनित्यता-हमें इस संसार की अनित्यता में खो नहीं जाना चाहिए।
प्रश्न 4. निम्नलिखित के विलोम शब्द लिखएि
स्वर्ग, धीर, नित्य, हार, सुख।
उत्तर
नरक, अधीर, अनित्य, जीत, दुःख।
प्रश्न 5. निम्नलिखित वाक्यों को बहुवचन में बदलिए
(क) महिला भजन गा रही है।
(ख) दुखी की सहायता करो।
(ग) तुम अपनी कठिनाई बताओ।
(घ) अपनी पुस्तक को संभालकर रखना चाहिए।
(ड) चिड़िया आकाश में उड़ रही है।
उत्तर
(क) महिलाएँ भजन गा रही हैं।
(ख) दुखियों की सहायता करो।
(ग) तुम अपनी कठिनाईयाँ बताओ।
(घ) अपनी पुस्तकों को संभालकर रखना चाहिए।
(ङ) चिड़िया आकाश में उड़ रही है।
प्रश्न 6. निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द छांटकर लिखिए
(क) आंख – दृग, आग, नयन, हर्ष, लोचन।
(ख) आकाश – पानी, गगन, बिजली, नभ, अम्बर ।
(ग) हवा -वायु, सुधा, पवन, समीर, सखा।
(घ) फूल -चिड़िया, सुमन, बादल, प्रसून, पुष्प।
उत्तर
(क) आँख – दृग, नयन, लोचन।
(ख) आकाश – गगन, नभ, अम्बर।
(ग) हवा – वायु, पवन, समीर।
(घ) फूल – सुमन, प्रसून, पुष्प।
📚 All Chapters:
- Chapter 1 मैं ढूँढ़ता तुझे था
- Chapter 2 जल ही जीवन है
- Chapter 3 भाई-बहन
- Chapter 4 अभिनन्दनीय भारत
- Chapter 5 मदनमोहन मालवीय
- Chapter 6 रामलाल का परिवार
- Chapter 7 वृक्ष निभाता रिश्ता-नाता
- Chapter 8 बाथरूम की फिसलन
- Chapter 9 साहस
- Chapter 10 कोई नहीं पराया
- Chapter 11 नई सुबह
- Chapter 12 जागो उपभोक्ता जागो
- Chapter 13 लोक संस्कृति और नर्मदा
- Chapter 14 सहनशीलता
- Chapter 15 स्पष्टवादी
- Chapter 16 रामेश्वरम्
- Chapter 17 तीर्थ-यात्रा
- Chapter 18 शंकराचार्य मध्यप्रदेश में
- Chapter 19 मीरा पदावली
- Chapter 20 कित्तूर की रानी चेन्नम्मा
- Chapter 21 आओ दीप जलाएँ
- Chapter 22 बोध कथाएँ
- Chapter 23 इतने ऊपर उठो कि
- Chapter 24 मित्र को पत्र
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