MP Board Class 8 हिंदी भाषा भारती Solutions Chapter 2 आत्मविश्वास प्रश्न उत्तर
Madhya Pradesh Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 2 आत्मविश्वास
By StudyEducation
बोध प्रश्न
प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
दुर्भाग्य = बुरा भाग्य; आत्महीनता = मन की हीन भावना; एकाग्रता = तल्लीनता; क्षमता = योग्यता, सामर्थ्य विश्वविख्यात = संसार में प्रसिद्ध; तल्लीनता = किसी काम में दत्तचित्त हो जाना; अभंग = अटूट, अखण्ड; सुगमता = आसानी; दुविधा = असमंजस; यथापूर्व = पहले की तरह अविचल = स्थिर, दृढ़ः सूक्ति = अच्छा कथन, सुभाषित; अखण्ड = जिसके टुकड़े न हो सकें, अटूट, समग्र रूप से; मर्सिया = शोक गीत।
प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
(क) बाली को क्या वरदान प्राप्त था ?
उत्तर
बाली को ऐसा वरदान प्राप्त था कि जो भी उसके सामने आता, उसकी आधी ताकत उसमें आ जाती थी। इस कारण बाली अपने सामने आये हुए व्यक्ति को आसानी से पछाड़ देता था।
(ख) राम बाली के सामने आकर क्यों नहीं लड़े?
उत्तर
बाली को अपने शत्रु (विरोधी) के आधे बल को खींच लेने का वरदान प्राप्त था। अत: राम उसके सामने आकर नहीं लड़े। यह वरदान बाली को शंकर भगवान ने दिया था। राम भगवान शंकर के वरदान का सम्मान करते थे।
(ग) कृष्ण ने महाभारत में सर्वोत्तम काम क्या किया?
उत्तर
महाभारत में कृष्ण ने न्याय के साथ पाण्डव पक्ष का सहयोग करते हुए निर्वासित पाण्डवों को उनका अधिकार प्राप्त करवाया। उनमें आत्मविश्वास पैदा किया।
प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(क) सामने वाले की आधी ताकत अपने में खींच लेने की शक्ति हमें सबमें हैं। कैसे?
उत्तर
सामने वाले की आधी ताकत अपने में खींच लेने की शक्ति हम सब में है। यह शक्ति आत्मविश्वास की है। यह शक्ति हम सबको प्राप्त है, परन्तु हम सबको अपनी इस आत्मशक्ति की पहचान नहीं है और न उसका उपयोग ही किया है। इस आत्मशक्ति का विकास विश्वास से होता है। हमें अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपनी सामर्थ्य में विश्वास पैदा करना होगा। हम अपने विरोधियों से सदा पिटते रहे हैं, क्योंकि उनके द्वारा पीटे जाने को हमने अपने लिए अनिवार्य मान लिया। यह सब इसलिए हुआ कि हमारे अन्दर कायरता और आत्महीनता ने स्थान बना लिया है जिससे हम डरपोक हो गये। अच्छे संस्कार हमसे दूर हो गये। बुरे संस्कारों का प्रभाव ऐसा पड़ा कि हम अपने बल की सही नापतौल नहीं कर सके। परिणाम यह हुआ कि विरोधियों को हमने अपनी अपेक्षा ताकतवर मान लिया, परन्तु आत्महीनता और कुसंस्कारों से छुटकारा प्राप्त करें और आत्मविश्वास से भरे आत्मबल के द्वारा हम अपनी विरोधी की आधी शक्ति अपने में खींच सकते हैं।
(ख) लेखक ने ‘हेलन केलर’ का उदाहरण देकर हमें क्या समझाना चाहा है ?
उत्तर
हेलन केलर एक प्रसिद्ध और उच्च कोटि की विचारक थीं। उन्होंने अपनी एक सूक्ति में कहा था कि हमें जब सफलता प्राप्त होती है तो उससे हमें सुख मिलता है, परन्तु लक्ष्य प्राप्ति में विफल होना निश्चय ही सुख के द्वार के बन्द होने के समान है। हम उस सफलता के न मिलने पर निराश और हतोत्साहित हो उठते हैं परन्तु उस निराशा की दशा में हम उत्साह से रहित हो जाते हैं। आत्मशक्ति और लक्ष्य प्राप्ति की सामर्थ्य से अपने विश्वास को खो बैठते हैं जबकि होना यह चाहिए कि उद्देश्य प्राप्ति हेतु अपने अन्दर की शक्ति को विकसित करना चाहिए और उसके प्रति मजबूत श्रद्धा और विश्वास रखना चाहिए। एक बार विफल होने पर हतोत्साहित नहीं होना चाहिए। सफलता पाने तक अपने प्रयास (कोशिश) चालू रखने चाहिए।
(ग) “आत्मविश्वास के बूते पर जीवन में सब कुछ करना संभव है,” किसी एक महापुरुष का उदाहरण देते हुए उक्त कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
आत्मविश्वास की ताकत कठिनाई पर विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य देती है। आत्मबल के विकास से हम सफलता के मार्ग पर आगे ही आगे बढ़ते जाते हैं। अपने आत्मबल के द्वारा मनुष्य अवश्य ही भाग्यवान बन जाता है। अतः भाग्यवान वही है जो उचित दिशा में अपने कर्तव्य का पालन करता है और अपने लक्ष्य की साधना में अपनी सामर्थ्य और क्षमता में पूरा विश्वास रखता है। मन में सदा अच्छे शुभ विचारों को स्थान दीजिए। हमें सफलता और सौभाग्य दोनों ही प्राप्त होंगे।
निराशा और उत्साहहीनता मनुष्य को आत्मबल से हीन बनाती है। जीवन सुख-दुःख के उतार-चढ़ाव से युक्त है। हम सदा उतार (दु:ख) की बातें ही नहीं सोचते रहें। इन दुःखों का क्या कारण है, जीवन में उतार क्यों आया-इस पर विचार करना होगा और चढ़ाव (उन्नति) के उपाय करते हुए ऊँचे भावों से युक्त मन को मजबूती देते रहना चाहिए। अन्त में सुख का द्वार अवश्य खुलेगा-जो जीवन की सफलता में छिपा हुआ है। विजयमाला उन्हें अर्पित की जाती है जो चुनौतियों का मुकाबला करते हैं और सफल होते हैं।
हमारे समक्ष नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का उदाहरण है, जिन्होंने अपने जीवन में सिर्फ चुनौतियों को ही चुना और सफलताओं के शिखर पर पहुँचते रहे। उनमें अटूट आत्मविश्वास था। इसके बल पर उन्होंने अपने विरोधियों की प्रत्येक कुचाल और कुचक्र को नष्ट किया। जीवन संघर्ष में सफलता के लिए अपनी क्षमता और सामर्थ्य में अखण्ड विश्वास होना चाहिए। इसके कारण जीवन में सब कुछ किया जाना सम्भव होता है।
प्रश्न 4.
नीचे लिखे गद्यांशों की प्रसंग देते हुए व्याख्या कीजिए
(क) जो लोग हमेशा उतार की ही बातें सोचते हैं, वे उन लोगों की तरह है। जो कूड़ाघरों के पास कुर्सी बिछाकर बैठ जाते हैं और शहर की गन्दगी को गाली देते हैं।
उत्तर
जिन लोगों में किसी उद्देश्य को प्राप्त करने का उत्साह नहीं होता और सदा निराशापूर्ण भावनाओं में ही डूबे रहते हैं, वे जीवन में उतार (अवनति) से प्राप्त दुःख की ही बातें करते रहते हैं। वे कभी भी उन्नति (चढ़ाव) के सुख की बात सोचते ही नहीं। अपने अन्दर की शक्ति और जीवन के लक्ष्य के प्रति श्रद्धा समाप्त कर बैठते हैं। वे कूड़ाघर के अन्दर पड़े कूड़े के समान निम्नकोटि की विचारधारा से युक्त होते हैं। वे अपनी दूषित विचारधारा को संस्कारित नहीं कर सकते। कूड़ेघर की गन्दगी उस समय ही हटेगी जब गन्दगी को एकत्र करने वाले उसे वहाँ से हटायेंगे। आलसी और कुसंस्कारित व्यक्तियों की निठल्ली बातें (गालियाँ) उनके लिए कभी भी लाभकारी नहीं हो सकेंगी।
(ख) जब कोई विरोधी हमारे सामने आता है तो हम अपनी आत्महीनता से, कायरता से, कुसंस्कार से, आत्मविश्वास की कमी से विरोधी का और अपना बल तौले बिना ही उसे अपने से शक्तिशाली मान लेते हैं।
उत्तर
लेखक का मत सत्य लगता है कि जब कोई विरोधी व्यक्ति अपने सामने आता है, तो हमारे मन में एक हीनभावना पैदा हो जाती है। इस हीनता की भावना का कारण होता है, हमारे अन्दर भरोसे की कमी; जिससे हम कायर बनने लगते हैं। यह सब बुरे संस्कारों के कारण होता है। अपनी क्षमताओं पर विश्वास न होने से हम अपने विरोधी को अपने आप से अधिक शक्तिशाली मान लेते हैं। हम अपने बल की नापतौल भी नहीं करते हैं। तात्पर्य यह है कि हम स्वयं अपने आप पर विश्वास खो बैठते हैं।
प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों का भाव स्पष्ट कीजिए
उत्तर
(क) सफलता की, विजय की, उन्नति की कुंजी अविचल श्रद्धा ही है।
भाव-हमारे अन्दर उद्देश्य (लक्ष्य) के प्रति अटूट विश्वास है तो निश्चय ही हम अपने उद्देश्य में सफल होते हैं। किसी भी चुनौती पर विजय प्राप्त करते हैं तथा लगातार उन्नति प्राप्त करते जाते हैं। अतः अटूट श्रद्धा (विश्वास) ही उपाय है-सफलता का, संघर्ष में विजय का; जीवन में उन्नति प्राप्त करने का।
(ख) हम अपनी सोच के कारण ही सफल, असफल होते हैं।
भाव-हम अपनी सोच के कारण ही सफलता के सुख का और असफलता के दु:ख का भोग करते हैं। सफलता की सोच आशावादी और असफलता की सोच निराशावादी होती है। अपने उद्देश्य के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास हमें सफल बनाता है जबकि इसके विपरीत हम हतोत्साहित होकर असफल ही होते हैं। यह सब हमारी सोच पर ही आश्रित है।
(ग) हममें आत्मविश्वास हो तो इससे हम विरोधी को आत्महीन कर सकते हैं।
भाव-आत्मविश्वास होने से मनुष्य उत्साहपूर्वक अपने लक्ष्य में सफल होता है, जिसके द्वारा वह अपने दुश्मनों को आत्मबल से रहित बना देता है। साधनहीन पाण्डवों ने अपने आत्मबल से कौरवों को निराश और बलहीन कर दिया।
भाषा-अध्ययन
प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
दुर्भाग्य, शक्तिशाली, आत्महीन, सर्वोत्तम, निश्चित, हतोत्साहियों।
उत्तर
विद्यार्थी उपर्युक्त शब्दों को ठीक-ठीक पढ़कर उनका शुद्ध उच्चारण करने का अभ्यास करें।
प्रश्न 2.
‘जीवन में उतार भी हैं और चढ़ाव भी’-इस वाक्य में उतार’ और ‘चढ़ाव’ परस्पर विलोम शब्द प्रयुक्त हुए हैं। इसी प्रकार एक ही वाक्य में निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग कीजिए
भला बुरा, दाता-याचक, सपूत-कपूत, निश्चित| अनिश्चित, भाग्यवानं-भाग्यहीन, पाप-पुण्य, सुख-दु:ख।
उत्तर
व्यक्ति को अपना भला-बुरा समझकर किसी काम को करना चाहिए।
ईश्वर और भक्त की स्थिति दाता और याचक के समान होती है।
सपूत और कपूत के लिए धन संचय करना व्यर्थ है।
निश्चित और अनिश्चित की दशा मनुष्य में दुविधा पैदा करती है।
मनुष्य अपनी सोच से स्वयं को भाग्यवान और भाग्यहीन समझ बैठता है।
पाप-पुण्य की परिभाषा परिस्थितिगत होती है।
सुख-दुःख मन के विकल्प होते हैं।
प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के स्थान पर हिन्दी मानक शब्द लिखिए
ताकत, विजिटिंग कार्ड, इशारा, मर्सिया।
उत्तर
ताकत = बल; विजिटिंग कार्ड = पहचान पत्र; वह कार्ड (पत्र) जिसमें स्वयं का परिचय रहता है; इशारा = संकेत; मर्सिया = शोक-गीत।
प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्यय और उपसर्ग पहचान करके अलग-अलग कीजिए
तल्लीन, दुर्भाग्य, शक्तिशाली, कायरता, एकाग्रता, खण्डित, अभागा।
उत्तर

प्रश्न 5.
निम्नलिखित सामासिक पदों का समास विग्रह करते हुए उनमें निहित समास पहचान कर लिखिए
आत्मविश्वास, कूड़ाघर, खन्दक-खाइयों, शक्तिहीन, यथापूर्व, विश्वविख्यात।
उत्तर

प्रश्न 6.
नीचे लिखे गद्यांशों को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर लिखिए
काँच के एक विशाल महल में एक भटका हुआ कुत्ता घुस गया। इस महल में वह जिधर भी देखता, उधर ही उसे कुत्ते दिखाई देते थे। उसने उन कुत्तों को देखकर सोचा कि ये सभी कुत्ते उस पर टूट पड़ेंगे और उसे मार डालेंगे। अपनी शान दिखाने के लिए जब उसने भौंकना शुरू किया तब उसे चारों ओर कुत्ते भौंकते सुनाई दिये। उसका दिल धड़कने लगा और बुरी तरह । घबरा गया। वह उन कुत्तों पर झपटा। तब उसने देखा कि वे कुत्ते भी उस पर झपट रहे हैं। वह जोर-जोर से भीका, कूदा किन्तु शीन ही बेहोश होकर गिर पड़ा।
(क) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।
(ख) इस गद्यांश में प्रयुक्त मुहावरे छाँटिए और अपने – वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
(ग) महल में कुत्ते को अपने चारों ओर कुत्ते क्यों दिखाई दे रहे थे ?
(घ) कुत्ते ने भौंकना क्यों शुरू किया ?
(ङ) उपर्युक्त गद्यांश में से साधारण वाक्य, मिश्रित वाक्य और संयुक्त वाक्य छॉटकर लिखिए।
उत्तर
(क) काँच का महल या मूर्ख कुत्ता।
(ख) प्रयुक्त मुहावरे-
भटका हुआ
टूट पड़ना
शान दिखाना
दिल धड़कना
घबरा जाना
झपट पड़ना।
वाक्य प्रयोग-
मार्ग से भटका हुआ व्यक्ति देर में अपने स्थान पर पहुँचता है।
राणा की सेना अपने शत्रुओं पर टूट पड़ी।
अपनी झूठी शान दिखाना महंगा पड़ता है।
परीक्षा के दिनों में मेरा दिल धड़कने लगता है।
अचानक आये समुद्री तूफान से नाविक घबरा गये।
भूखे भेड़िये की तरह सैनिक अपने शत्रुओं पर झपट
(ग) महल काँच से बना हुआ था, काँच की दीवारों पर उस । कुत्ते को अपना प्रतिबिम्ब दिखाई दे रहा था।
(घ) अपने प्रतिबिम्ब को ही दूसरे कुत्ते समझकर उसने भौंकना शुरू कर दिया।
(ङ) साधारण वाक्य
काँच के एक विशाल महल में एक भटका हुआ कुत्ता घुस गया।
वह उन कुत्तों पर झपटा।
मिश्रित वाक्य
इस महल में वह जिधर भी देखता, उधर ही उसे कुत्ते दिखाई देते थे।
अपनी शान दिखाने के लिए जब उसने भौंकना शुरू किया तब उसे चारों ओर कुत्ते भौंकते सुनाई दिये।
तब उसने देखा कि वे कुत्ते भी उस पर झपट रहे हैं।
संयुक्त वाक्य
उसका दिल धड़कने लगा और वह बुरी तरह घबरा गया।
वह जोर-जोर से भौंका, कूदा किन्तु शीघ्र ही बेहोश होकर गिर पड़ा।
📚 All Chapters:
- Chapter 1 वर दे
- Chapter 2 आत्मविश्वास
- Chapter 3 मध्य प्रदेश की संगीत विरासत
- Chapter 4 अपराजिता
- Chapter 5 श्री मुफ्तानन्दजी से मिलिए
- Chapter 6 भक्ति के पद
- Chapter 7 भेड़ाघाट
- Chapter 8 गणितज्ञ, ज्योतिषी आर्यभट्ट
- Chapter 9 बिरसा मुण्डा
- Chapter 10 प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए
- Chapter 11 गिरधर की कुण्डलियाँ
- Chapter 12 याचक और दाता
- Chapter 13 न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है
- Chapter 14 नव संवत्सर
- Chapter 15 महेश्वर
- Chapter 16 पथिक से
- Chapter 17 वसीयतनामे का रहस्य
- Chapter 18 युद्ध-गीता
- Chapter 19 बहादुर बेटा
- Chapter 20 नन्हा सत्याग्रही
- Chapter 21 सालिम अली
- Chapter 22 गीता का मर्म
- Chapter 23 महान विभूति: दानवीर डॉ. सर हरिसिंह गौर
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