MP Board Class 8 हिंदी भाषा भारती Solutions Chapter 18 युद्ध-गीता प्रश्न उत्तर

Madhya Pradesh Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 18 युद्ध-गीता

By StudyEducation


भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 18 युद्ध-गीता प्रश्न उत्तर हिंदी



प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर लिखिए

(क) राक्षस सेना के चलने पर धरती पर क्या प्रभाव पड़ा है ?

उत्तर

राक्षस सेना के चलने पर धरती व्याकुल हो उठी।

(ख) कवि ने दौड़ते वानर-भालुओं की तुलना किससे की है?

उत्तर

कवि ने दौड़ते वानर-भालुओं की तुलना पंख धारण करके उड़ने वाले पर्वत समूह से की है।

(ग) श्रीराम के पराक्रम का मुख्य आधार क्या है ?

उत्तर

श्रीराम के पराक्रम का मुख्य आधार धर्म केतत्व (शौर्य, धैर्य, सत्य-शील, साहस, यम-नियम, दम, दया, परोपकार आदि) हैं।

(घ) धर्मरथ के दो पहिए कौन-कौन से हैं ?

उत्तर

धर्मरथ के दो पहिए-शौर्य और धैर्य हैं।

प्रश्न 3.
शिक्षक की सहायता से सही जोड़ी बनाइए

उत्तर

(क) → (3), (ख) → (4), (ग) → (2), (घ)→(1)

प्रश्न 4.
इन प्रश्नों के उत्तर तीन से चार पंक्तियों में लिखिए

(क) युद्धभूमि में विभीषण ने अधीर होकर श्रीराम से क्या कहा ?

उत्तर

युद्ध भूमि में विभीषण ने अधीर होकर श्रीराम से कहा कि हे स्वामी आपका शत्रु रावण युद्ध की सभी सामग्री (साधन-रथ आदि) से युक्त है। आपके पास वे साधन नहीं हैं जिनकी सहायता से युद्ध लड़ा जा सके और शत्रु पर विजय प्राप्त हो सके।

(ख) श्रीराम ने विभीषण की शंका का समाधान किस प्रकार किया?

उत्तर

श्रीराम ने विभीषण की शंका का समाधान करते हुए कहा कि जिस रथ की सहायता लेकर विजय प्राप्त की जाती है, वह अन्य (दूसरे ही) प्रकार का होता है। वह धर्म रथ होता है जिसमें शौर्य-धैर्य के पहिए, सत्य-शील की मजबूत ध्वजा होती है। विवेक का बल होता है। इन्द्रिय दमन और परोपकार के घोड़े क्षमा और कृपा की रस्सी से बँधे होते हैं। इन सभी सद्गुणों के रथ पर सवार होकर बाहरी और आन्तरिक शत्रुओं को जीता जा सकता है।

(ग) आत्मशक्ति और बाह्यशक्ति में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

आत्मशक्ति में धर्म के वे तत्व सम्मिलित हैं जिन्हें हम धर्म के आधारभूत तत्व मानते हैं। इनमें शौर्य, धैर्य, सत्य-शील, साहस, यम-नियम, दम, दया, परोपकार आदि गुण सम्मिलित होते हैं। इसे ही सद्गुणों से संयुक्त धर्म रथ कहते हैं। बाह्य शक्ति में-भौतिक साधन होते हैं जिनमें रथ, कवच व अनेक प्रकार की युद्ध सामग्री से युक्त अति बलवान सैनिक होते हैं। इस बाह्यशक्ति में सद्गुणों का अभाव होता है।

(घ) श्रीराम ने धर्मरथ में जोते चार घोड़े किसे कहा है ?

उत्तर

श्रीराम ने धर्मरथ में जोते हुए चार घोड़े-विवेक, दम, परहित तथा क्षमा को बताया है। इनके द्वारा खींचा गया रथ सर्वत्र गति पकड़े रहता है। मनुष्य अपने विवेक, दम, परहित और क्षमा के बल से किसी भी बाधा पर विजय प्राप्त कर लेता है।

(ङ) संसार रूपी शत्रु को किस रथ पर सवार होकर जीता जा सकता है?

उत्तर

संसार रूपी शत्रु को धर्मरथ पर सवार होकर जीता जा सकता है। इस धर्मरथ में शौर्य और धैर्य के पहिए लगे रहते हैं। सत्य और शील का मजबूत ध्वज होता है। क्षमा, कृपा और समता की रस्सी से बल, विवेक, दम और परोपकार के घोड़े जुते रहते हैं। इस विशेष प्रकार के रथ पर सवार व्यक्ति संसार-शत्रु को जीतकर अपने वश में कर लेता है।

भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए

लोभ, समकक्ष, पराक्रम, धर्मनीति, आत्मशक्ति, दुर्जय, मर्यादा।

उत्तर

लोभ पाप का मूल होता है।
रवि और मोहन को परस्पर समकक्ष ही लाभ मिल सकेगा।
महाराणा प्रताप ने अपने पराक्रम से ही देश की आजादी का दीपक बुझने नहीं दिया।
भारतीय धर्म नीति सहिष्णुता प्रधान है।
आत्मशक्ति शम और दम से बढ़ सकती है।
रावण की सेना वानर-सेना के लिए दुर्जय बन चुकी थी।
मर्यादा का उल्लंघन कष्टकारी हो सकता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्ग पहचानकर लिखिए

विशेष, विरथ, अधीर, दुर्जय।

उत्तर

शब्द उपसर्ग + शब्द

विशेष = वि + शेष
विरथ = वि + रथ
अधीर = अ + धीर.
दुर्जय = दु: + जय

प्रश्न 3.
बॉक्स में कुछ शब्द और उनके विलोम शब्द लिखे हैं। इनकी सही जोड़ियाँ बनाकर लिखिए

उचित, अपेक्षा, विजय, लाभ, जीवन, सुरक्षा, पराजय, धर्म, अनुचित, मृत्यु, असुरक्षा, उपेक्षा, अधर्म, हानि।

उत्तर

सही – जोड़ियाँ

उचित → अनुचित
अपेक्षा → उपेक्षा
विजय → पराजय
लाभ → हानि
जीवन → मृत्यु
सुरक्षा → असुरक्षा
धर्म → अधर्म।

प्रश्न 4.
पाठ के आधार पर जोड़े बनाइए

(क) रण – (1) दर्शन
(ख) युद्ध – (2) रथ
(ग) मार्ग – (3) सिर
(घ) धर्म – (4) नीति
(ङ) दस – (5) कला

उत्तर

(क) → (4), (ख) → (5), (ग) → (1), (घ)→ (2), (ङ)→ (3)

प्रश्न 5.
निम्नलिखीत शब्दों का समास विग्रह करते हुए समास का नाम लिखिए
धर्मनीति, प्रतिदिन, आत्मशक्ति, राम-रावण।

उत्तर

प्रश्न 6.
निम्नलिखित अनुच्छेद में यथास्थान उचित विराम चिह्न लगाइए|

चरित्र का अर्थ है आचरण या चाल-चलन यहाँ आचरण का अर्थ है सदगुणों का भण्डार जिस व्यक्ति के व्यवहार में सत्य, न्याय, प्रेम, मानवता, करुणा, दया, अहिंसा, त्याग आदि गुण एकत्र हो जाते हैं वह चरित्रवान कहलाता है यहाँ चरित्र की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है किस बल पर पाण्डव कौरवों पर भारी पड़े किस बल पर वनवासी राम ने लंकापति रावण को परास्त किया|

उत्तर

चरित्र का अर्थ है, आचरण या चाल-चलन । यहाँ आचरण का अर्थ है, सद्गुणों का भण्डार। जिस व्यक्ति के व्यवहार में सत्य, न्याय, प्रेम, मानवता, करुणा, दया, अहिंसा, त्याग आदि गुण एकत्र हो जाते हैं; वह चरित्रवान कहलाता है। यहाँ चरित्र की जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। किस बल पर पाण्डव कौरवों पर भारी पड़े ? किस बल पर वनवासी राम ने लंकापति रावण को परास्त किया ?

प्रश्न 7.
(अ) निम्नलिखित छन्दों के चरणों में मात्राएँ पहचानकर उनका नाम लिखिए।

उत्तर

चौपाई छन्द है। चौपाई के प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं। अन्त में जगण और तगण का प्रयोग नहीं होता है।

प्रश्न 7.
(ब) इस पाठ में से अनुप्रास अलंकार के उदाहरण छाँटकर लिखिए।

उत्तर

बिविध भाँति बाहन रथ जाना। बिपुल बरन पताक ध्वज नाना॥
बरन बरन बिरदैत निकाया। समर सूर जानहिं बहु माया॥ .
अति विचित्र बाहिनी बिराजी। बीर बसंत सेनु जनु साजी॥
अमन अचल मन त्रोन समाना। सम जम नियम सिलीमुख नाना॥

प्रश्न 8.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम शब्द लिखिए

धीरज, सौरज, सील, छमा, ईस, बुधि, ताकत, जम।

उत्तर

धैर्य
शौर्य
शील
क्षमा
ईश
बुद्धि
शक्ति
यम।

प्रश्न 9.
पाठ में आए उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा अलंकार के अन्य उदाहरण छाँटकर लिखिए।

उत्तर

उपमा-अमन अचल मन त्रोन समाना। रूपक-महा अजय संसार रिपु, जीती सकइ सो बीर। उत्प्रेक्षा-प्राबिट जलद मरुत जनु प्रेरे।


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