MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 18 सत्कर्म एव धर्मः

Madhya Pradesh Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 18 सत्कर्म एव धर्मः

By StudyEducation




MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 18 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 18 MP Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत(एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) विक्रमादित्यः नगरभ्रमणसमये किं दृष्टवान्? (विक्रमादित्य ने नगर भ्रमण के समय क्या देखा?)
उत्तर:
रुग्णम्। (रोगी को)

(ख) विक्रमादित्यः महामन्त्रिणि राज्यभारं समर्प्य कुत्र अगच्छत्? (विक्रमादित्य महामन्त्री पर राज्यभार को समर्पित करके कहाँ गये?)
उत्तर:
वनम्। (वन में)

(ग) महात्मा कस्य समीपे तपस्यारतः आसीत्? (महात्मा किसके पास तपस्यारत थे?)
उत्तर:
विक्रमादित्यस्य। (विक्रमादित्य के)

(घ) महात्मा योगबलेन तत्र कस्य दृश्यं दर्शितवान्? (महात्मा ने योग के बल से वहाँ किसका दृश्य दिखाया?)
उत्तर:
यमलोकस्य। (यमलोक का)

(ङ) कर्मणां लेखनं कस्य पार्वे अस्ति? (कर्मों का लेखा किसके पास है?)
उत्तर:
चित्रगुप्तस्य। (चित्रगुप्त के)

(च) श्रेष्ठाचरणस्य प्रतिज्ञां कृत्वा विक्रमादित्यः कुत्रः आगतवान्? (श्रेष्ठ आचरण की प्रतिज्ञा करके विक्रमादित्य कहाँ आये?)
उत्तर:
उज्जयिनीम्। (उज्जयिनी में)

Class 8 Sanskrit Chapter 18 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) महात्मा विक्रमादित्यं किम् उपदिष्टवान्? (महात्मा ने विक्रमादित्य को क्या उपदेश दिया?)
उत्तर:
महात्मा विक्रमादित्यं उपदिष्टवान् यत्-“राजन्! भवान् तु यथानीति राजधर्मस्य पालनं करोतु। धर्मानुकूलं शासनम् अपि धर्म एव भवति” इति। (महात्मा ने विक्रमादित्य को उपदेश दिया कि-“हे राजन्! आप तो नीति के अनुसार राजधर्म का पालन करो। धर्म के अनुसार शासन भी धर्म ही होता है।)

(ख) कर्म-तपस्योः कः भेदः? (कर्म और तपस्या में क्या भेद है?)
उत्तर:
कर्मणः स्थानम् भिन्नम् परं तपस्या स्वर्गप्राप्तेः साधनम्।” इति कर्म-तपस्ययोः भेदः। (“कर्म का स्थान भिन्न है परन्तु तपस्या स्वर्ग प्राप्ति का साधन है।” ऐसा कर्म और तपस्या का भेद है।)

(ग) विक्रमादित्यः अन्ते किं ज्ञातवान्? (विक्रमादित्य ने अन्त में क्या जाना?)
उत्तर:
विक्रमादित्यः अन्ते ज्ञातवान् यद्-‘सदाचारः एव तपस्या, सत्कर्म एव धर्म’ इति। (विक्रमादित्य ने अन्त में यह जाना कि-“सदाचार ही तपस्या है, सत्कर्म ही धर्म है”।)

(घ) विक्रमादित्यः लोके कथं प्रसिद्धः? (विक्रमादित्य संसार में कैसे प्रसिद्ध हैं?)
उत्तर:
विक्रमादित्यः लोके सत्कर्मणा एव प्रसिद्धः। (विक्रमादित्य संसार में सत्कर्म से ही प्रसिद्धः हैं।)

(ङ) विक्रमादित्यस्य ध्येयवाक्यं किम् आसीत्? (विक्रमादित्य का ध्येय वाक्य क्या था?)
उत्तर:
विक्रमादित्यस्य ध्येयवाक्यं ‘सत्कर्म एव धर्मः’ इति आसीत्। (विक्रमादित्य का ध्येय वाक्य ‘सत्कर्म ही धर्म है’ यह था।)

(च) विक्रमादित्यस्य मनसि केन वैराग्यम् उद्भूतम्? (विक्रमादित्य के मन में किससे वैराग्य उत्पन्न हुआ?)
उत्तर:
विक्रमादित्यस्य मनसि रुग्णदर्शनेन वैराग्यम् उद्भूतम्। (विक्रमादित्य के मन में रोगी को देखने से वैराग्य उत्पन्न हुआ।)

(छ) “सत्कर्म एव धर्मः” कथायाः सारः कः? (“सत्कर्म ही धर्म है” कथा का सारांश क्या है?)
उत्तर:
अस्याः कथायाः सारः यत् ‘मनुष्यः उत्तमानि कर्माणि कृत्वा अपि परलोकं साधयितुम् शक्नोति’ इति। (इस कथा का सारांश है कि ‘मनुष्य अच्छे कार्य करके भी परलोक सिद्ध कर सकता है।)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 18 प्रश्न 3.
रिक्तस्थानानि पूरयत(रिक्त स्थान भरो-)
(क) विक्रमादित्यस्य समीपे एकः ……….. तपस्यारतः आसीत्। (महात्मा/दुरात्मा)
(ख) तपस्या ……… साधनम्। (स्वर्गप्राप्ते/राज्यप्राप्तेः)
(ग)यमराजः …………. आदिष्टवान्। (विक्रमादित्यम्/दूतेभ्यः)
(घ) वने सः कठिनां …………. आरब्धवान्। (दिनचर्यां/तपस्याम्)
(ङ) प्रजापालनं धर्म …….. अस्ति। (तपस्वीनाम्/राज्ञाम्)
उत्तर:
(क) महात्मा
(ख) स्वर्गप्राप्तेः
(ग) दूतेभ्यः
(घ) तपस्याम्
(ङ) राज्ञाम्।।

Class 8 Sanskrit Chapter 18 Question Answer प्रश्न 4.
उचितं मेलयत(उचित को मिलाओ-)

उत्तर:
(क) → (v)
(ख) → (iv)
(ग) → (ii)
(घ) → (iii)
(ङ) → (i)

MP Board Class 8 Sanskrit प्रश्न 5.
नामोल्लेखपूर्वकं समासविग्रहं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए समास विग्रह करो-)
(क) ध्येयवाक्यम्
(ख) तपस्यारतः
(ग) प्रजापालनम्
(घ) योगबलेन
(ङ) श्रेष्ठाचरणेन।
उत्तर:

Class 8 Sanskrit Chapter 17 MP Board प्रश्न 6.
नामोल्लेखपूर्वकं सन्धिविच्छेदं कुरुत(नामे का उल्लेख करते हुए सन्धि विच्छेद करो-)
(क) धर्मानुकूलम्
(ख) नेति
(ग) सदाचारः
(घ) अद्यापि
(ङ) विक्रमादित्यः।
उत्तर:

Class 7 Sanskrit Chapter 18 प्रश्न 7.
रेखाङ्कितशब्दानाम् आधारेण प्रश्ननिर्माणं कुरुत (रेखांकित शब्दों के आधार पर प्रश्न निर्माण करो-)
(क) विक्रमः अवदत्। (विक्रम बोला।)
उत्तर:
कः अवदत्? (कौन बोला?)

(ख) तपस्या तु महात्मनां कर्म इति। (तपस्या तो महात्माओं का काम है।)
उत्तर:
तपस्या तु केषाम् कर्म इति? (तपस्या तो किनका काम है?

(ग) तत्रैव यमलोकस्य दृश्यं दर्शितवान्। (वहीं यमलोक का दृश्य दिखाया?)
उत्तर:
कुत्र यमलोकस्य दृश्यं दर्शितवान्? (कहाँ यमलोक का दृश्य दिखाया?)

(घ) यमराजः दूतान् पृच्छति? (यमराज दूतों से पूछते हैं।)
उत्तर:
यमराजः कान् पृच्छति? (यमराज ने किनसे पूछा?)

(ङ) राज्ञः धर्म प्रजापालनम्। (राजा का धर्म प्रजा का पालन है।)
उत्तर:
कस्य धर्मः प्रजापालनम्? (किसका धर्म प्रजा का पालन है?)

📚 All Chapters:

Comments