नए इलाके में… खुशबू रचते हैं हाथ Question Answer Hindi Chapter 10 Class 9 हिन्दी Sparsh

Madhya Pradesh Board Class 9 Hindi Sparsh Solutions Chapter 10 नए इलाके में… खुशबू रचते हैं हाथ

By StudyEducation

स्पर्श कक्षा 9 पाठ 10 नए इलाके में… खुशबू रचते हैं हाथ प्रश्न उत्तर हिंदी




नए इलाके में

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(क) नए बसते इलाके में कवि रास्ता क्यों भूल जाता है?
उत्तर: नए बसते इलाके में कवि रास्ता इसलिए भूल जाता है क्योंकि वहाँ पुराने परिचित निशान गायब हो गए हैं और नया परिवेश अपरिचित है।

(ख) कविता में कौन-कौन से पुराने निशानों का उल्लेख किया गया है?
उत्तर: कविता में पुराने निशानों के रूप में पीपल, बरगद, नीम, और गाँव के परंपरागत रास्तों का उल्लेख किया गया है।

(ग) कवि एक घर पीछे या दो घर आगे क्यों चल देता है?
उत्तर: कवि एक घर पीछे या दो घर आगे इसलिए चल देता है क्योंकि नए इलाके में सारी गलियाँ एक-सी लगती हैं, जिससे वह भटक जाता है।

(घ) ‘वसंत का गया पतझड़’ और ‘बैसाख का गया भादों को लौटा’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: इन पंक्तियों का अभिप्राय है कि समय और ऋतुएँ बदल गई हैं, पुरानी स्मृतियाँ और परंपराएँ लुप्त हो रही हैं, जैसे वसंत और बैसाख का स्थान पतझड़ और भादों ने ले लिया।

(ङ) कवि ने इस कविता में ‘समय की कमी’ की ओर क्यों इशारा किया है?
उत्तर: कवि ने ‘समय की कमी’ की ओर इशारा किया है क्योंकि आधुनिक जीवन की व्यस्तता में लोग पुरानी स्मृतियों, परंपराओं और प्रकृति से जुड़ने का समय खो रहे हैं।

(च) इस कविता में कवि ने शहरों की किस विडंबना की ओर संकेत किया है?
उत्तर: कवि ने शहरों की विडंबना की ओर संकेत किया है कि आधुनिक विकास ने पुराने परिचित निशानों को मिटा दिया है, जिससे लोग अपनी जड़ों और स्मृतियों से कट गए हैं।

2. व्याख्या कीजिए-

(क) यहाँ स्मृति का भरोसा नहीं, एक ही दिन में पुरानी पड़ जाती है दुनिया
उत्तर: इस पंक्ति का भाव है कि आधुनिक जीवन में स्मृतियाँ जल्दी पुरानी हो जाती हैं। नए परिवेश में पुराने निशान मिट जाते हैं, जिससे परिचित दुनिया एक दिन में ही अपरिचित लगने लगती है।

(ख) समय बहुत कम है तुम्हारे पास, आ चला पानी ढहा आ रहा अकास, शायद पुकार ले कोई पहचाना ऊपर से देखकर
उत्तर: इस पंक्ति का भाव है कि जीवन में समय बहुत कम है। जैसे पानी बहता है और आकाश ढहता प्रतीत होता है, वैसे ही जीवन तेजी से बदल रहा है। शायद कोई परिचित व्यक्ति ऊपर (आकाश) से देखकर पुकार ले।

खुशबू रचते हैं हाथ

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(क) ‘खुशबू रचनेवाले हाथ’ कैसी परिस्थितियों में तथा कहाँ-कहाँ रहते हैं?
उत्तर: ‘खुशबू रचनेवाले हाथ’ गरीबी, अभाव और कठिन परिस्थितियों में रहते हैं। वे झुग्गी-झोपड़ियों, टूटी-फूटी मड़ैया और गंदे, तंग गलियारों में रहते हैं।

(ख) कविता में कितने तरह के हाथों की चर्चा हुई है?
उत्तर: कविता में चार तरह के हाथों की चर्चा हुई है: अगरबत्ती बनाने वाले, फूल चुनने वाले, धूप रचने वाले और मेहनत करने वाले गरीबों के हाथ।

(ग) कवि ने यह क्यों कहा है कि ‘खुशबू रचते हैं हाथ’?
उत्तर: कवि ने कहा है कि ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ क्योंकि गरीब मजदूरों के हाथ अगरबत्तियाँ, फूल और धूप बनाते हैं, जो सुगंध फैलाते हैं और जीवन को सुंदर बनाते हैं।

(घ) जहाँ अगरबत्तियाँ बनती हैं, वहाँ का माहौल कैसा होता है?
उत्तर: जहाँ अगरबत्तियाँ बनती हैं, वहाँ का माहौल गंदा, तंग और गरीबी से भरा होता है। झुग्गी-झोपड़ियों में धूल-धुआँ और अभाव का वातावरण होता है।

(ङ) इस कविता को लिखने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इस कविता का मुख्य उद्देश्य गरीब मजदूरों की मेहनत और उनके द्वारा रची गई सुगंध की महत्ता को उजागर करना है, साथ ही उनकी कठिन जिंदगी की विडंबना को दर्शाना है।

2. व्याख्या कीजिए-

(क) (i) पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ, जूही की डाल से खुशबूदार हाथ
उत्तर: इस पंक्ति का भाव है कि मेहनतकश लोगों के हाथ, जो पीपल के पत्तों और जूही की डाल से अगरबत्तियाँ बनाते हैं, प्रकृति से जुड़कर सुगंध रचते हैं। ये हाथ मेहनत और सृजन का प्रतीक हैं।

(क) (ii) दुनिया की सारी गंदगी के बीच, दुनिया की सारी खुशबू, रचते रहते हैं हाथ
उत्तर: इस पंक्ति का भाव है कि गरीब मजदूर गंदगी और अभाव भरे माहौल में रहते हुए भी अपने कठिन परिश्रम से अगरबत्तियों के माध्यम से दुनिया को सुगंध प्रदान करते हैं।

(ख) कवि ने इस कविता में ‘बहुवचन’ का प्रयोग अधिक किया है? इसका क्या कारण है?
उत्तर: कवि ने ‘हाथों’ का बहुवचन प्रयोग किया है क्योंकि यह समाज के उन असंख्य मेहनतकश लोगों का प्रतीक है, जो सामूहिक रूप से अपनी मेहनत से सुगंध रचते हैं।

(ग) कवि ने हाथों के लिए कौन-कौन से विशेषणों का प्रयोग किया है?
उत्तर: कवि ने हाथों के लिए विशेषणों का प्रयोग किया है: नए-नए, खुशबूदार, मेहनतकश, और गंदगी में सने हुए।


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